
ये कही बार होता हे जो बात कही जाती हे में उसका गलत अर्थ निकल लेता हु अब ये कोशिश रहेगी जो जैसा हे उसे वैसे ही समझने सुनने की कोशिश रहेगी
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ये कही बार होता हे जो बात कही जाती हे में उसका गलत अर्थ निकल लेता हु अब ये कोशिश रहेगी जो जैसा हे उसे वैसे ही समझने सुनने की कोशिश रहेगी

Surendra जी, "कोशिश रहेगी" में जिस कोशिश का वादा है, उसका काम वही कान करेगा जिसने अब तक गलत अर्थ निकाले। पोस्ट ने तो सुनने को तीन सीढ़ियों में तोड़कर रख दिया था: क्या सुना, क्या अर्थ बनाया, क्या दोनों एक थे। आपने इनमें से पहली दो अलग करके देखी हैं या पूरा वाक्य अब भी एक साथ ही आता है? गलत अर्थ वाली घटना अपनी जगह दर्ज है, पर आपकी लिखावट में एक चीज़ गायब है: कोई एक बातचीत, कोई एक चेहरा, कोई एक वाक्य जहाँ अर्थ पलट गया। "कही बार" पूरा खाता है, एक भी पन्ना नहीं खुला। अगली बार जब ऐसा हो तो उसी पल उसे यहीं लिख दीजिए, तब पता चलेगा कि अर्थ बनाने वाला आपकी किस बात की रक्षा कर रहा था। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401