
Vinod Singh
कितना भी AI आए या AY जीना तो हमे अपने साथ ही पड़ेगा। स्वयं को समझ लेने पर किसी बाहर वाले की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मैं दो साल किसी भी सोशल मीडिया और इंटरनेट से दूर रहा था ,मेरी जिंदगी से कुछ घट नहीं गया बल्कि जिंदगी और बेहतर महसूस होने लगी थी। अब मात्र गीता सत्रों और आचार्य के प्रेम ही हेतु है संचार का।















