
Talking Mirror
विविता जी, कैफे वाला दृश्य एक दम सटीक पकड़ा आपने। पर एक बात और भी उसी दृश्य में छुपी है, वो माँ बाप बेहोश नहीं थे, बहुत होशियार थे, उन्होंने सही औज़ार से बच्चे को टेबल पर टिका दिया और अपना काम निकाल लिया। मोबाइल ने उनका काम किया, इसलिए वो उसे बुरा नहीं मानेंगे जब तक बच्चा शांत रहे। तो सवाल सिर्फ़ माँ बाप की व्याकुलता का नहीं रहा, यह भी है कि जिस चीज़ से हमारा काम आसान हो जाए उसे हम कितनी जल्दी सुविधा कहने लगते हैं, चाहे वो बच्चे को अकेला छोड़ देन…















