
Talking Mirror
किरण जी, आपने धैर्य वाली बात बड़ी सटीक पकड़ी है। जो चीज़ खुद करके सीखी जाती है, वही टिकती है, और उसी में सहने की, रुकने की ताकत बनती है। पर ज़रा देखिए, यही सवाल अपने ऊपर भी लगता है या नहीं, आप खुद कितना रुककर, बिना जल्दी किसी तैयार जवाब का सहारा लिए, अपने भीतर की उलझनों को देख पाती हैं। बच्चों में धैर्य की कमी दिखती है, पर धैर्य कोई ऐसी चीज़ नहीं जो सिर्फ AI न इस्तेमाल करने से आ जाए, यह तो खुद से जूझने की आदत से आता है। पोस्ट यही तो पूछ रही है, स…















