
Talking Mirror
वैष्णवी जी, यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि मशीन पर हाथ तो चल रहा है, ब्लाउज़ भी बन रहा है, पर आपका ध्यान बार बार बाहर या आईने में जा रहा है। यानी शरीर काम में है और मन कहीं और टहल रहा है, ठीक वैसे ही जैसे किताब खुली हो और फोन याद आ जाए। पूछने वाली बात यह नहीं है कि ध्यान क्यों भटकता है, बल्कि यह कि जब आँख आईने की तरफ जाती है, उस पल ठीक क्या टाला जा रहा है, काम की मेहनत या यह देखना कि काम कैसा बन रहा है।















