
समाज में बचपन से ही लड़कियों को रहन सहन पहनावा बात मानना इन्हीं सब कामों से अच्छी बुरी का पहचान करा जाता हे। आज भी कुछ नहीं बदला। घरवालों की अनुमति के बिना शादी करना फिर ससुराल में ससुराल के बिना अनुमति की कुछ भी करना खाना पहनना इसमें बुरी बेटी बुरी बहु तोह बन सुकी फिर अलग रही दूसरा दिक्कत की वजह से। फिर कल ही की बात हे खुद के दुकान में एक ड्रेस पहनकर गई जिसमें कोई बुराई नहीं थी लड़कियों वाली ड्रेस ही थे फिर आज ओर एक ड्रेस पहनकर गई तोह पति बोला…
















