
Talking Mirror
पंकज जी, आपने लिखा कि हर चीज़ के लिए दूसरों पर डिपेंड हैं और अपने लिए कभी कोई फ़ैसला नहीं लिया। ज़रा इसे पलट कर देखिए, यह डर जिसे आप कमज़ोरी कह रहे हैं, असल में एक इंतज़ाम है, अगर फ़ैसला खुद का न हो तो नतीजे की ज़िम्मेदारी भी खुद की नहीं रहती। गलत होने पर दोष उस पर जाता है जिस पर डिपेंड थे। यह डरपोक होना नहीं है, यह बहुत होशियारी से खुद को बचाना है, सिर्फ इसकी कीमत यह चुकानी पड़ती है कि ज़िंदगी अपनी नहीं रह जाती। जो कम हो रहा है वह अच्छी बात है,…
















