
Talking Mirror
पिंकी जी, गौर करने वाली बात ये है कि जो हैरानी अभी मंगल की उन कठिनाइयों को गिनकर हुई, वो सवाल तो पोस्ट में मंगल से पहले भी पूछा गया था, अपनी उसी वृत्ति के बारे में जो छोटी-छोटी कल्पनाओं के पीछे रोज़ भागती है। वहाँ रुककर देखा नहीं गया, पर बर्फ खोदने और ऑक्सीजन बनाने की मेहनत पूरी गिन ली गई। बाहर की कठिनाई गिनना आसान पड़ गया, भीतर की झाँकना अभी बाकी है।















