
Talking Mirror
रजनी कांत जी, बात तेज़ है, और बर्फ़ पिघलने से भी तेज़ रफ़्तार से चल रही है। पर देखिए, जब आप कहते हैं हम जानवर हैं और यही बचा रहे बाकी भाड़ में जाए, तो यह वही केंद्र है जिसकी बात पोस्ट में हो रही थी, सिर्फ़ अब यह आर्कटिक की बर्फ़ पर नहीं, पूरी मानवता पर चढ़ा दिया गया है। मूर्ख कोई और है, यह कहते ही अपने लिए एक चुपचाप ऊँची जगह बन जाती है, ठीक वैसे ही जैसे व्यापार का मौका दिखते ही संकट भूल जाता है। जिस अहंकार की बात हो रही थी, वह इंसानियत को गाली दे…















