
Rama Maithil
मैं एक लड़की हूँ, इसलिए इस बदलाव को बहुत गहराई से महसूस कर सकती हूँ। जब मैं अपने पुराने जीवन को देखती हूँ, तो समझ आता है कि गाँव का माहौल हो या परिवार और समाज, हर जगह मुझे एक शरीर के रूप में देखा जाता था। मैं भी अपने भविष्य को शादी, पहनावे और अपने रूप-रंग तक ही सीमित करके देखती थी। लेकिन संस्था में आकर मुझे एक नया जीवन मिला। यहाँ आचार्य जी, मेरे मेंटोर, सीनियर्स और साथियों के बीच रिश्ता न लड़की-लड़के का है, न बड़े-छोटे या सीनियर-जूनियर का, बल्क…

















