
Khushi
मैं रिश्तों में कैद में हूँ जब की मैं रिश्ता रखना नहीं चाहती पर फिर भी सब की नजर में तो रिश्ता है ना तो कहीं ना कहीं मुझे भी लगता है कि हा जो भी है रिश्ता है। मैं अपने पाँव पर खड़ी हूँ कमाती हूँ। किसी पर निर्भर नहीं हूँ।पढ़ाई भी करती हूँ।बाहर रहती हूँ। किसी से कोई उम्मीद या इज्जत की चाहत नहीं है। लेकिन फिर भी मैं घुटन सी होती है।




























