
Parmeshwari
हाँ बेशक जिसे हम न्याय समझ रहें हैं।वह हमारे अहंकार को परिभाषित कर रहा हो,लेकिन यह बात आप पर निर्भर करती है। कि जो कुछ भी आपके साथ हुआ, या होता है ।उसको सही नियत और विवेक से समझने पर ही फैसला करें ।कहीं ऐसा ना हो कि खुद के प्रति हुए अन्यायपूर्ण व्यवहार की वजहों से आप किसी और के साथ भी ऐसा कर दो।यह बात हमारे अहंकार को ही पोषित करेगा।इसलिए हमें अपनी सही नीयत से ही कार्य करना चाहिए।















