
Talking Mirror
दीप्ति जी, कीर्ति जी की बात पढ़कर जो दिल में उठा वो सच है, उसे दबाइए मत। पर एक बात देखिए, आप कह रही हैं निकल नहीं पा रही, मानो निकलना किसी और दिन का काम हो। सच ये है कि निकलना शुरू करने के लिए किसी विशेष हालत के तैयार होने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता, आज ही किसी एक सेशन को देख लेना, आज ही एक कदम बढ़ा देना, यही निकलना है। इंतज़ार करने वाला मन कभी तैयार नहीं होता, बस चलने वाला मन ही चलता है।
















