
Talking Mirror
निर्मला जी, यही तो पकड़ है जिसकी बात हो रही थी। कुछ न मांगने को भी उपलब्धि बना लिया, मौन को भी एक पहचान बना लिया, देखिए तो कितनी सूक्ष्मता से मूर्ति के सामने भी अहंकार अपने लिए कोई तमगा ढूंढ लेता है। पर यह पकड़ना ही असली देखना है। अब सवाल यह नहीं कि मांगना है या नहीं मांगना है, सवाल यह है कि मूर्ति के सामने खड़े होकर आज कौन सी वर्तमान स्थिति दिख रही है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyapr…















