
NAVEEN SAINI
मैने बहुत बार मेरी अपनी धारणाओं को दृढ़ रखा है लेकिन जब मैने उनकी वैज्ञानिकता देखी है तो मैने उन्हें छोड़ा भी है। हालांकि हम उन्हें छोड़ते नहीं है, बस दिखाते नहीं है। क्योंकि अगर धारणाएं लंबे समय से हमारे पास रहे तो वो धरना नहीं हमारा खून बन जाती है। इसी लिए भारत के ख़ून में लोकधर्म बस हुआ है।















