
हेमलता सरल
हम समाज में चल रही छोटी-छोटी मान्यताओं एवं परंपराओं को भी बिना जांच पड़ताल के अपना लेते हैं कि इससे हमारे जीवन पर कुप्रभाव पड़ेगा। जैसे- बचपन में मैंने स्मृति से ही पढ़ा था कि शूद्रों और स्त्रियों को धर्मग्रंथों का अध्ययन नहीं करना चाहिए। हम लोग एस टी वर्ग से आते हैं। फिर भी मैंने हिम्मत करके रामचरित-मानस और शिवपुराण को खरीदकर उसका अध्ययन किया। फिर आचार्य जी आए और उन्होंने जाॅंत-पाॅंत कोनहीं माना और स्त्री वर्ग को सभी किताबें पढ़ने की छूट दी।…















