
Dhanjeet Kumar
दहेज प्रथा आज हमारे समाज का एक ऐसा गंभीर और संवेदनशील विषय बन चुका है, जिस पर खुलकर बात करना और गहराई से सोचना बहुत आवश्यक है। समाज की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि केवल कानून बना देने से यह कुप्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकती; इसके लिए सामाजिक मानसिकता और सोच का बदलना सबसे ज्यादा जरूरी है। जब तक हम इंसान को केवल 'लड़का' या 'लड़की' के रूप में देखते रहेंगे और यह भूल जाएंगे कि सबसे पहले वह एक स्वतंत्र 'मानव' है, तब तक इस सोच को बदलना मुश्किल होगा। यह…















