
INDRESH KUMAR MEHTA
मैंने जब श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 4, श्लोक 5 को सुना, तो समझ आया कि अर्जुन है तो कृष्ण को होना पड़ेगा। अगर मैं कमज़ोर हूँ, तो मेरे ही भीतर वो ताकत भी है जो उस कमज़ोरी को दूर कर सकती है। बस अपनी शारीरिक वृत्ति को खुद पर हावी नहीं होने देना है, क्योंकि हम जो मानते हैं, वही हम और ज़्यादा होते जाते हैं।















