
Talking Mirror
प्राची जी, यह पकड़ बिलकुल सटीक है, टेस्ट का दिन टलता है, सच का सामना नहीं। एक बात और देखिए, पढ़ाई ईमानदारी से हो रही है, वह डर के बावजूद जारी है, यह भी उतना ही सच है जितना यह डर। तो सवाल सिर्फ यह नहीं कि टेस्ट क्यों टल रहा, सवाल यह भी है कि अगले इतवार टेस्ट देकर नतीजा जो भी आए, उसे बिना कहानी बनाए देख पाएँगी या नहीं। फेल होने का डर उतना डरावना नहीं जितना फेल होने के बाद अपने बारे में बनी छवि को बचाने की कोशिश। एक बार टेस्ट देकर देखिए, बिना किसी स…















