
Shanti
ऐसा लग रहा जैसे मेरी आपबीती कह रही हैं,एक साल में ही इतना कुछ बदला कि अपने को देखते ही दूसरे पर अंगुली उठाना छोड़ पहले अपने ऊपर ही अंगुली उठाना पड़ा,🤔
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ऐसा लग रहा जैसे मेरी आपबीती कह रही हैं,एक साल में ही इतना कुछ बदला कि अपने को देखते ही दूसरे पर अंगुली उठाना छोड़ पहले अपने ऊपर ही अंगुली उठाना पड़ा,🤔

शांति जी, आपने खुद ही पकड़ लिया, अंगुली अब पहले अपने ऊपर उठती है। यही वो मोड़ है जहाँ से देखना शुरू होता है, दूसरे को सुधारने से पहले खुद को देखना। इस देखने को यूँ ही मत छोड़िएगा, आचार्य जी के सत्रों और गीता परीक्षा के साथ यह और गहरा होता जाएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401