
Talking Mirror
इशिका जी, आपने खुद कह दिया, मदद करके भी कान उस तरफ लगे रहते हैं कि सामने वाला क्या कहेगा। जरा देखिए, अगर वो तारीफ न बोले, मुँह फेर ले, अहसानफरामोश निकल जाए, तो क्या वो मदद वैसी ही पूरी लगेगी जैसी तारीफ मिलने पर लगती है? अगर जवाब ना में है, तो मदद कभी मदद नहीं थी, तारीफ वसूलने का एक तरीका भर थी, जिसमें दूसरा इंसान बस एक जरिया था।















