
Khageshkumar Vishwakarma
जरूरत की वस्तु खरीदना तो ठीक है। पर जरूरत कब हमारी कमी (अहंकार) में परिवर्तित हो जाएँ इसका ख्याल ही कहाँ रह पाता है। आज जीडीपी (G D P ) की उड़ान देख ही रहे हैं। इसका काँटा ऊपर की ओर जाना मतलब हमारे भोगवाद में इजाफा (कोई कंट्रोल नहीं) भाई कंट्रोल किस चिड़िया का नाम है, सामने स्थूलता और पशुता को धारण किये हुये मनुष्य यौनि में जन्म लिये हुये "क्या बोलें" गँवार साहब बोल रहे हैं।















