
Renu Singh
कीमत तो आज नहीं तो कल हमें ही चुकानी है। सही मायने में कहा जाए तो अभी भी चुका ही रहे है ।कहां है वह मौसम जो हुआ करते थे। हमारे जीवन शैली ही हम पर भारी पड़ रही है और अहंकार बाहरी विषयों पर ध्यान दे रहा है ।और अपने अंदर झांकने की कोशिश नहीं कर रहा है। हमारी जरूरत से ज्यादा उपभोग करने की वजह से ही यह सब हो रही है ।ना हम उपभोग इतना करेंगे ना बाजार में इतनी चीजें उपलब्ध होगी। जब हमारी डिमांड बढ़ती है तभी मार्केट में भी तरह-तरह की वस्तुओं का निर्माण ह…















