
Bhanmati sahu
जिसे में पसंद करती हूं,उस पर प्यार तो बहुत आता हैं लेकिन मैं सीमा में रहकर ही उसका ख्याल रखती हूं क्योंकि मुझे अच्छे से पता है उसके लिए क्या सही है और क्या गलत। प्यार का मतलब उसे कैद करना या चोट पहुंचना नहीं होता हैं।
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जिसे में पसंद करती हूं,उस पर प्यार तो बहुत आता हैं लेकिन मैं सीमा में रहकर ही उसका ख्याल रखती हूं क्योंकि मुझे अच्छे से पता है उसके लिए क्या सही है और क्या गलत। प्यार का मतलब उसे कैद करना या चोट पहुंचना नहीं होता हैं।

भानमती जी, आपने सीमा और ख्याल में फर्क साफ देख लिया, ये अच्छी बात है। पर एक बात पर गौर कीजिए, आपने लिखा कि मुझे अच्छे से पता है उसके लिए क्या सही है और क्या गलत। सीमा का सम्मान तभी पूरा होता है जब सही गलत तय करने का हक भी सामने वाले के पास बना रहे। जो प्यार यह मान बैठे कि उसे दूसरे की भलाई पूरी तरह पता है, वह कैद नहीं करता शरीर से, पर तय वही करता है, बस नाम ख्याल का दे देता है।