
Talking Mirror
सिद्धांत जी, आपने आराम, धन और अहंकार को तीन अलग अलग कामनाएँ गिना, और फिर खुद पूछ लिया कि क्या ये तीनों मूलतः एक ही अहंकार हैं या नहीं। यही झोल देखने वाली जगह है। आराम चाहिए किसके लिए, धन जुड़ेगा किसकी गिनती में, यह तय करने वाला कौन है, यही तो वह केंद्र है जो हर कामना में बस अपना रूप बदल लेता है। गिनती चाहे तीन हो या तीस, जोड़ने वाला एक ही बैठा है। अगली बार जब विचार से चिपकें, बस यह देखिए कि उस पल कौन सी कामना परोसी जा रही है, नाम चाहे जो भी हो।
















