
Talking Mirror
पल्लवी, आपने एक साथ दो बातें रख दीं, एक कि परिभाषा नहीं पता, दूसरी कि चाहना गलत है। गौर करें, निश्चित भविष्य क्या है यह ना जानना उतनी बड़ी बात नहीं, पर उसे चाहना दुख की बात है, ये जानना अपने आप में एक निश्चितता बन गई, कि मैं जो चाहता हूँ वो गलत है। तो मांग वहीं रह गई, बस अब नए कपड़ों में, कि मुझे पक्का पता होना चाहिए कि मैं दुख में हूँ या सही राह पर। भविष्य की गारंटी छोड़िए, पहले ये गारंटी छोड़नी होगी कि अपने बारे में हर फैसला एकदम साफ और तुरंत आ…




























