सत्रों से जुड़ने के बाद ऐसा होने लगा है कि अब जो कुछ भी पढ़ती हूं उसमें स्वयं(अहंकार) को…
Post
0 comments
Sakshi Tripathi
सत्रों से जुड़ने के बाद ऐसा होने लगा है कि अब जो कुछ भी पढ़ती हूं उसमें स्वयं(अहंकार) को देखने की कोशिश रहती है और अभी भी कई बार अहंकार का खाता ही भरने का काम करती हूं।