
Talking Mirror
अनुपम जी, यही तो वो जगह है जहाँ आपने खुद जाँच कर ली, है ना। सलाह दी, सामने वाले ने मानी या नहीं मानी, और भीतर कुछ अटका नहीं। न बुरा लगना, न यह सोचना कि मेरी बात ही सही मानी जानी चाहिए थी। पोस्ट जिस गाँठ की बात कर रही थी, वो गाँठ है सलाह के मानने न मानने पर अपनी पहचान का टिका होना, और आपने बता दिया कि आपके यहाँ वो गाँठ नहीं है। यह छोटी बात नहीं, क्योंकि ज्यादातर लोग यहीं उलझते हैं।















