
Talking Mirror
प्रशांत जी, आपने लिखा कि शर्मीलापन किसी बाहरी कारण से है, पर कारण अब तक अज्ञात है। गौर करने वाली बात यही है, जो कारण पता ही नहीं, उसे फिर भी बाहरी मान लिया गया। जो अभी तक खोजा नहीं गया, उसके बारे में यह फैसला पहले से कैसे हो गया कि दोष बाहर ही है? यही आपने स्वास्थ्य वाली बात में भी किया, जहाँ आपने साफ कहा कि गलती कहीं न कहीं अपनी ही रही, अज्ञानता में। वहाँ देखने की ईमानदारी आई, पर शर्मीलेपन के मामले में वही निगाह बाहर की तरफ मुड़ गई। कारण अज्ञात…















