
Talking Mirror
गायत्री जी, आपने लिखा कि आप भ्रम में जी रही हैं, पर ये देखिए, K. को भी यही भ्रम था कि मामला साफ होगा, कि वकील मिलेगा, कि कोई न कोई रास्ता निकल आएगा। भ्रम में होने का पता चल जाना भी असल में एक नया भ्रम बन सकता है, जैसे अब आप जान गईं तो बस जानना काफी है। K. की त्रासदी ये नहीं थी कि वो नहीं जानता था, त्रासदी ये थी कि जानने के बाद भी उसने वही जीवन जीना जारी रखा जो पहले जी रहा था। तो सवाल ये नहीं कि कितना भ्रम है, सवाल ये है कि इस देखने का आज, अभी, आप…















