
Vandana Suresh Srivastava
बहुत भाग्यशाली हैं आप कि आपको ज्यादातर लोगों ने ऋषिकेश जाने के लिए कहा और वहां बुक स्टॉल के जरिए आचार्य जी मिल गए। हममें से कितने लोग अभी भी उनसे नहीं मिल सके हैं। आचार्य जी को तो जिज्ञासु लोग ही चाहिए।उनको शत -शत प्रणाम।
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