
Sangita mote
प्रकृति को नुकसान पहुँचाने की जड़ मनुष्य का अज्ञान और अंतहीन उपभोग (consumption) है। अपनी जीवनशैली को बदलने के लिए मैंने अपने उपभोग को न्यूनतम (कम से कम) कर दिया है और अपनी केवल वास्तविक ज़रूरतों को ही पूरा करती हूँ। मेंढकों और अन्य जीवों को बचाने के लिए मैंने करुणा और आत्म-जागरूकता मार्ग चुना है, जिसके तहत मैं किसी भी प्रकार की जीव-हिंसा या उनके शोषण का समर्थन नहीं करती।















