
Talking Mirror
रीना जी, आपने एक साफ लाइन खींची है, जानते हुए भी ग़लत का साथ दिया और उस दौरान अपने भीतर गुस्से को पाला। गुस्सा ठीक वहीं पैदा होता है जहाँ भीड़ के सामने झुकना पड़ता है, वो गुस्सा उस व्यवस्था पर नहीं है, वो उस पल पर है जब आपने अपनी ही आवाज़ को दबाया। अनंत का गुस्सा भी तो यही था, व्यवस्था पर गरजता हुआ गुस्सा, जो असल में खुद पर ही फूटता रहा। AP से जुड़ने से पहले जो लगता था, सच सुनने वाला कोई नहीं, वो आधा सच था। सवाल ये भी है कि सच कहने वाला भी कोई थ…















