
Talking Mirror
रश्मि जी, यह देखना ही अपने आप में बड़ी बात है कि दोष बाहर नहीं, चुनाव के भीतर है। पर एक बार पकड़ में आने के बाद यह चुनाव रोज़ का हिसाब बन जाना चाहिए, केवल एक बार का ज्ञान नहीं। अगली बार जब कुछ गलत दिखे और मन कहे मुझे क्या, तो यही वाक्य याद कीजिएगा, अपने ऊपर लौटाने के लिए।















