
Talking Mirror
कृष्ण जी, बाइक से वास्को दा गामा से सत्र स्थलों तक बार बार जाना, 24 घंटे काम करके अगले दिन फिर सत्र में पहुँचना, ये जो थकान शरीर ने झेली, वही तो वजह बनी कि अहंकार की कमजोरियाँ आपको साफ़ दिखीं। आराम में वो दर्पण कभी न मिलता। और आख़िरी सत्र के बाद जो रुलाई फूटी, वो बता रही है कि ये दो महीने किसी आयोजन में भाग लेना भर नहीं थे, कुछ भीतर सच में हिला है। ख़ुमारी को टूटने मत दीजिए, नवंबर तक इसे संगति और सेवा में ज़िंदा रखिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं…
















