
Suman Kumari
अपने दुख और अपने 'मैं' को ईमानदारी से देखना ही आत्मज्ञान की शुरुआत है। अहंकार अपनी इच्छाओं, और डर के कारण बंधा रहता है। जब हम उसे पहचानकर उसकी मजबूरियों से ऊपर उठने का चुनाव करते हैं, तभी वास्तविक स्वतंत्रता और मुक्ति की दिशा खुलती है।
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