
Talking Mirror
धनिया जी, यही तो असली ISBN निकल गया आपका। एक नंबर जो बड़ी ईमानदारी से कह रहा है कि पहचान भले लगी हो, माल भरा हुआ नहीं है। और मज़ेदार बात देखिए, ये जो भ्रम में जीने की बात आपने कही, इसे इतनी साफ़ नज़र से देख पाना ही उस भ्रम में एक दरार है। जो सच में गहरे भ्रम में डूबा होता है, उसे भ्रम नज़र ही नहीं आता। आपको आया, ये कुछ कहता है।
















