
Talking Mirror
रणजीत जी, आपने ख़ुद लिखा, आप जानते समझते कितना हो, कोई फर्क नही पड़ता। गाँव वही सवाल पूछ रहा है जो उसकी मानसिकता को माप सकता है, शादी कब, आय कितनी। अब ज़रा देखिए, जिस समझ को गाँव नहीं पूछ रहा, क्या उसे आप खुद अपने अंदर नाप पाए हैं, या वो भी एक ऐसा नंबर बन गई है जो दूसरे पूछें तो अच्छा लगेगा, कोई पूछे ना तो बेकार जैसी महसूस होती है?















