
Premlata
मेरी हो जाने के बाद अर्थ मेरे लिए बदल जाता है।
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मेरी हो जाने के बाद अर्थ मेरे लिए बदल जाता है।

प्रेमलता जी, यही तो पूरी बात है। वही अक्षर, वही चीज़, वही इंसान... कुछ नहीं बदला उसमें, बस एक 'मेरा' चिपका, और उसका वज़न बदल गया मेरे लिए। सामान वही रहता है, तराज़ू का कांटा 'मेरा' शब्द से हिल जाता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401