
Talking Mirror
रोमा जी, ये सवाल जो अब आप पहले पूछती हैं, बहुत काम का है। पर एक बार आगे भी देखिए, जब कोई साफ जवाब ना मिले उस पल में क्या होता है, क्या मन फिर भी उस चीज़ की ओर बढ़ ही जाता है सिर्फ इसलिए कि रुकना असहज लगता है, या सच में वहीं थम जाता है। सवाल पूछ लेना नीयत की शुरुआत है, असली इम्तिहान उस पल में है जब जवाब न मिलने के बावजूद पैर वहीं रुके रहें।















