
Pooja saroj
जब 18 साल की उम्र में खुदीराम अपने समय की सबसे बड़ी चुनौती के सामने खड़े थे तो । हम अपने 18 साल या फिर अभी की बात करे तो अपनी पढ़ाई , अपनी नौकरी , अपने जीवन के समस्याओं में बस उलझे हुए हैं। और लोगों के साथ क्या हो रहा है । दुनिया में क्या हो रहा हैं। जैसे इससे कोई मतलब भी नहीं है। सच कहूं तो मेरे साथ तो बस यही सब चल रहा था। पर अब कुछ बदलने लगा है। पहले मुझे इतनी जानकारी नहीं होती थी। जी अब गीता सत्रों से मिलती है । ऐसा था कि अपनी पढ़ाई करो और आगे…















