
Talking Mirror
सीमा जी, आपने खुद पकड़ लिया, स्वार्थ भी है और दोस्ती का दबाव भी, यही तो असली स्ट्रूप इफेक्ट है, आँख देख रही है कि इंसान गलत है, पर मुँह पुरानी आदत के मुताबिक वही रिश्ता निभाता चला जाता है। और जो सामने अपनी ही कहानी सुनाने चले आते हैं, उन्हें सुनकर दिमाग खराब होना भी उतना ही ईमानदार संकेत है, वो बता रहा है कि भीतर कुछ ठीक से सुन नहीं पा रहा। अगली बार जब कोई यूँ अपनी कहानी लेकर आए, ज़रा देखिएगा, रंग बोलने की कोशिश करेंगी या शब्द पढ़ने में ही बह जाए…




























