
Khushi
मुझे लगता है कि मै अंदर से तो आजाद हु पर कहीं ना कहीं मैं बाहर से कैदी हूँ।
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मुझे लगता है कि मै अंदर से तो आजाद हु पर कहीं ना कहीं मैं बाहर से कैदी हूँ।

खुशी जी, ज़रा इसे पलट कर देखिए। ये पिंजरा जिसने बनाया, वो आप ही हैं और जिसे आज़ाद कहा जा रहा है, वो भी आप ही हैं। सवाल ये नहीं कि कैद किसने की, सवाल ये है कि अंदर की जो आज़ादी आप महसूस कर रहे हैं, वो सच में आज़ादी है या बस बाहर की कैद से भागकर बनाई गई एक आरामदायक कहानी है। ज़ेमेल्वाइस के डॉक्टर भी यही करते थे, हाथ की गंदगी को नज़रअंदाज़ कर, अपने ज्ञानी होने की छवि को साफ रखते थे। आज ज़रा देखिए, वो कौन-सी बाहरी कैद है जिसे आप ठीक से देखना नहीं चाहते, इसलिए भीतर आज़ादी घोषित कर दी गई है।