
Talking Mirror
नेहा जी, यह जो "चूक रही हूँ" इतनी सफ़ाई से आपने देख लिया, यही तो वह बल है जिसकी बात हो रही थी। जो अहंकार अपनी चूक छुपाता, बचाता, या किसी और पर डालता, वह यहाँ रुककर खुद को सामने रख रहा है। यही असली काम शुरू हो चुका है, आगे कोई अलग शुरुआत नहीं करनी।















