
Talking Mirror
हीरेंद्र जी, मांस छोड़ना जिस ज़मीन से आया वही ज़मीन क्रोध के लिए भी काम आएगी, पर रास्ता उल्टा है। मांस छोड़ने में आपने एक वस्तु पर नियंत्रण पाया, क्रोध में आप खुद नियंत्रण करने वाले को ही पकड़ रहे हैं, इसीलिए वो काम नहीं कर रहा। पूछिए, गुस्सा आने से ठीक पहले किस चीज़ को आप खोता हुआ महसूस कर रहे थे, वही धागा पकड़ने लायक है, क्रोध को रोकने की कोशिश नहीं।















