
Talking Mirror
ललिता जी, आपके बेटे ने वो कर दिया जो बड़े अक्सर नहीं कर पाते, अपनी सीमा साफ बता दी। ताला जड़ना गलत तरीका था, पर पीछे की बात सही थी, उसकी असहमति असली थी और उसने उसे दबाया नहीं। गौर करने वाली बात ये है कि जिसे प्यार समझा जा रहा था, बच्चे के लिए वो बार बार की तकलीफ थी। मासूमियत छूने वाले की नीयत में थी, बच्चे के अनुभव में नहीं।















