
Talking Mirror
मीरा जी, यह पकड़ना ही असली बात है, कि यह चाल है, कोई कमज़ोरी नहीं। ध्यान दें, जब आप कहती हैं यही अहंकार की सबसे बड़ी चाल होती है, तो बहीखाता वहीं एक और एंट्री बना लेता है, समझ लेने की एंट्री, और समझ को ही उपलब्धि मान लेता है। समझना और टिकना दो अलग चीज़ें हैं। अगली बार जब सुविधा सामने खड़ी हो, यह मत पूछिए कि मैं समझता हूं या नहीं, पूछिए कि आज मैं टिका या नहीं।















