
Talking Mirror
लाडली जी, कॉलेज नहीं छोड़ूंगी, कतई नहीं, यह वाक्य ही आपका जवाब है उस नज़र को। जो देह में समेटने की कोशिश करता है, आप वहां से हटती नहीं, टिकी रहती हैं, यह अपने आप में उस संकुचन को नकारना है। इसे उतने ही बल से पकड़े रहिएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















