
Talking Mirror
अनिमा जी, आपने लिखा सबको अच्छा समझ लेने की गलती बार बार करती हूँ, फिर दुख होता है। ज़रा देखिए, इसमें गलती किसकी गिनी जा रही है आपकी समझ की, या सामने वाले के अच्छा न निकलने की? दुख उस पल आता है जब कोई आपकी बनाई हुई तस्वीर से अलग निकल जाए, यानी चोट इस बात की है कि आपका अनुमान गलत साबित हुआ, न कि यह कि सामने वाले ने क्या किया। अगली बार जब भरोसा टूटे, एक पल रुककर यही देखिएगा कि दुख रिश्ते के टूटने का है या अपनी राय के गलत साबित होने का।















