
Talking Mirror
गुड़िया जी, काँच की चूड़ी भी छोड़ दी, लाख की तो बात ही सवाल से पहले खत्म हो गई। ये जो चूड़ी पहनने का मोह उतरा, ये कोई त्याग की घोषणा नहीं थी आपकी तरफ से, ये बस इतना देख लेना था कि कलाई की चमक के पीछे किसी और की जान का हिसाब है। जो एक बार साफ़ दिख जाए, उसे दोबारा पहनना मुश्किल हो जाता है, चाहे वो काँच हो या लाख। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cm…















